Munawwar Rana shayari in hindi

Munawwar Rana shayari in hindi 

मुनव्वर राणा Munawwar Rana इस सदी के मशहूर शायर  shayar जिनकी सोमवार की सुबह तबीयत खराब हो गई वह गिर गये और सीने में दर्द के साथ बेहोश हो गये । और उन्हें फिर से जीवनदान दिया गया लेकिन शाम को उन्हें वेंटिलेटर से हटा दिया गया। हालांकि, वह अभी भी आईसीयू में भर्ती हैं। उनके बेटे तबरेज़ राणा ने भी पुष्टि की कि उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है और उम्मीद है कि कुछ दिनों में छुट्टी दे दी जाएगी।


       Munawwar rana Shayari image


muflisi shayari


अब मुझे अपनी पज़ीराई से डर लगता है 
इतनी शोहरत हो तो रुस्वाई से डर  लगता है 


विश्व प्रसिद्ध कवि मुनव्वर राणा की मौत की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। इस पर टिप्पणी करते हुए, मुनव्वर राणा, जो आईसीयू में हैं, मुनव्वर राणा कहते हैं “अभी मै  ज़िंदा हूँ“,  जैसा कि TOI द्वारा बताया गया है, अनुभवी कवि और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता मुनव्वर राणा (64) थे, संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) में सोमवार को भर्ती हुए

मूल नाम :मुनव्वरराना 

Name-Munawwar Rana

जन्म :- 26 Nov 1952, उत्तर प्रदेश, भारत 



Munawwar Rana died?


Munawwar Rana The famous shayar of this century, whose Health is bad had deteriorated on Monday morning and he was given life, but in the evening he was removed from the ventilator. However, he is still recruited in ICU. His son Tabrez Rana also confirmed that his condition is improving and he expects to be discharged within a few days.

Ab mujhe apni pazirai se dar lagta hai
Itni shohrat ho to ruswai se dar lagta hai


The news of world famous poet Munawwar Rana’s death has become viral on social media. Commenting on this, Munawwar Rana, who is in ICU, says, “I am still alive”, as told by TOI, veteran poet and Sahitya Akademi award winner Munawar Rana (64), Sanjay Gandhi posted Graduate Institute of Medical Sciences (SGPG) recruited on Monday.


मुनव्वर राना मुशायरों का ज़रूरी हिस्सा



मुनव्वर राणा अपने अहेद के मुकम्मल शायर हैं जो की अपने आप में एक अलग मुकाम रखते हैं राणा साहब को माँ का शायर कहना ग़लत नहीं होगा क्यूंकि उन्हों ने अपने शायरी के सफर में सबसे ज़्यादा शेर माँ पर ही लिखे हैमुनव्वर राणा ने माँ के शायरी के साथ साथ ज़िन्दगी के कई ऐसे पहलू पर भी शेर लिखे हैं जिसको आज की पीढ़ी मार्गदर्शन के रूप में अपने जीवन में उपयोग कर के परेशानी से निजात पाने में सफल हो सकती है राणा साहब ने मजदूर और ग़रीब की आवाज़ और दर्द को अपनी शायरी में बयां करके ज़िन्दगी को जीने का अंदाज़ बताने की कोशिश की है 

राणा साहब ने muflisi shayari, two line shayari on muflisi, munawwar rana shayari on garibi, Shayari of Munawwar Rana Rekhta Poets, Best And Famous Munawwar Rana Shayari Collection Hindi, ऐसे बहोत से विषय पर शायरी लिखी है जिनको  रेख़्ता पोएट्स Rekhta Poets मुनव्वर राना की लोकप्रिय शायरी – Munawwar Rana संग्रह इसी ब्लॉग में प्रस्तुत कर रहा है 


Munawwar Rana shayari in hindi मुनव्वर राणा शायरी हिंदी में

अलमारी से ख़तउस के पुरानेनिकल आए
फिर से मिरेचेहरे पे येदाने निकल आए
माँ बैठ केतकती थी जहाँसे मिरा रस्ता
मिट्टी के हटातेही ख़ज़ाने निकलआए
 बचपन में हीहम घर सेकमाने निकल आए
रेत केज़र्रे तिरा एहसानबहुत है
आँखों को भिगोनेके बहाने निकलआए
अब तेरे बुलानेसे भी हम नहीं सकते
हम तुझ सेबहुत आगे ज़मानेनिकल आए
एक ख़ौफ़ सा रहताहै मिरे दिलमें हमेशा
किस घर सेतिरी याद जाने निकल आए

मुनव्वर राना की शायरी | रेख़्ता पोएट्स 



ख़ुद अपने हीहाथों का लिखाकाट रहा हूँ
ले देख लेदुनिया मैं पताकाट रहा हूँ
ये बात मुझेदेर से मालूम हुईहै
ज़िंदाँ है येदुनिया मैं सज़ाकाट रहा हूँ
दुनिया मिरे सज्देको इबादत समझना
पेशानी पे क़िस्मतका लिखा काटरहा हूँ
अब आप कीमर्ज़ी है इसेजो भी समझिए
लेकिन मैं इशारेसे हवा काटरहा हूँ
तू ने जोसज़ा दी थीजवानी के दिनोंमें
मैं उम्र कीचौखट पे खड़ाकाट रहा हूँ


थकन को ओढ़के बिस्तर मेंजा के लेटगए
हम अपनी क़ब्रमुक़र्ररमें जा केलेट गए
तमाम उम्र हमइक दूसरे सेलड़ते रहे
मगर मरे तोबराबर में जाके लेट गए
हमारी तिश्नानसीबी काहाल मत पूछो
वो प्यास थी किसमुंदर में जाके लेट गए
जाने कैसीथकन थी कभीनहीं उतरी
चले जो घरसे तो दफ़्तरमें जा केलेट गए
ये बेवक़ूफ़ उन्हें मौतसे डराते हैं
जो ख़ुद हीसायाख़ंजरमें जा केलेट गए
तमाम उम्र जोनिकले थेहवेली से
वो एक गुम्बदबेदर मेंजा के लेटगए
सजाए फिरते थे झूटीअना जो चेहरोंपर
वो लोग क़स्रसिकंदरमें जा केलेट गए
सज़ा हमारी भी काटीहै बालबच्चोंने
कि हम उदासहुए घर मेंजा के लेटगए


Munawwae Rana two line shayari sangrah/मुनव्वर 

राणा शायरी और ग़ज़ल का संग्रह

 

Shayari of Munawwar Rana | Rekhta



अब आप की मर्ज़ी है सँभालें न सँभालें
ख़ुशबू की तरह आप के रूमाल में हम हैं



अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है



आते हैं जैसेजैसे बिछड़ने केदिन क़रीब
लगता है जैसेरेल से कटनेलगा हूँ मैं



एक आँसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है
तुम ने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना


Famous Shayari of Munawwar Rana- Rekhta poets


ख़ाकवतन तुझ से मैं शर्मिंदा बहुत हूँ
महँगाई के मौसम में ये त्यौहार पड़ा है

कुछ बिखरी हुई यादों के क़िस्से भी बहुत थे
कुछ उस ने भी बालों को खुला छोड़ दिया था

किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा
अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा

किसी दिन मेरी रुस्वाई का ये कारन बन जाए
तुम्हारा शहर से जाना मिरा बीमार हो जाना

तुझे मालूम है इन फेफड़ों में ज़ख़्म आए हैं
तिरी यादों की इक नन्ही सी चिंगारी बचाने में


तुम्हारे शहर में मय्यत को सब कांधा नहीं देते
हमारे गाँव में छप्पर भी सब मिल कर उठाते हैं

तुम्हारा नाम आया और हम तकने लगे रस्ता
तुम्हारी याद आई और खिड़की खोल दी हम ने

तमाम जिस्म को आँखें बना के राह तको
तमाम खेल मोहब्बत में इंतिज़ार का है
दहलीज़ पे रख दी हैं किसी शख़्स ने आँखें
रौशन कभी इतना तो दिया हो नहीं सकता

दौलत से मोहब्बत तो नहीं थी मुझे लेकिन
बच्चों ने खिलौनों की तरफ़ देख लिया है
पचपन बरस की उम्र तो होने को गई
लेकिन वो चेहरा आँखों से ओझल हो सका

फेंकी मुनव्वरने बुज़ुर्गों की निशानी
दस्तार पुरानी है मगर बाँधे हुए है

फ़रिश्ते कर उन के जिस्म पर ख़ुश्बू लगाते हैं
वो बच्चे रेल के डिब्बों में जो झाड़ू लगाते हैं

बच्चों की फ़ीस उन की किताबें क़लम दवात
मेरी ग़रीब आँखों में स्कूल चुभ गया


Best And Famous Munawwar Rana Shayari Collection Hindi
Best And Famous Munawwar Rana Shayari 

Collection 

Hindi


बोझ उठाना शौक़ कहाँ है मजबूरी का सौदा है
रहते रहते स्टेशन पर लोग क़ुली हो जाते हैं

भले लगते हैं स्कूलों की यूनिफार्म में बच्चे
कँवल के फूल से जैसे भरा तालाब रहता है

मैं दुनिया के मेआ पे पूरा नहीं उतरा
दुनिया मिरे मेआ पे पूरी नहीं उतरी

मिट्टी का बदन कर दिया मिट्टी के हवाले
मिट्टी को कहीं ताजमहल में नहीं रक्खा

मिरे बच्चों में सारी आदतें मौजूद हैं मेरी
तो फिर इन बदनसीबों को क्यूँ उर्दू ज़बाँ आई

मोहब्बत एक पाकीज़ा अमल है इस लिए शायद
सिमट कर शर्म सारी एक बोसे में चली आई

सो जाते हैं फ़ुटपाथ पे अख़बार बिछा कर
मज़दूर कभी नींद की गोली नहीं खाते

हम नहीं थे तो क्या कमी थी यहाँ
हम होंगे तो क्या कमी होगी

तुम्हें भी नींद सी आने लगी है थक गए हम भी
चलो हम आज ये क़िस्सा अधूरा छोड़ देते हैं
Rekhta Poets
Asif.

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