Nida Fazli poetry in hindi निदा फ़ाज़ली की शायरी हिन्दी में

निदा फ़ाज़ली आधुनिक कवियों और शायरों में एक बहोत ही लोकप्रिय शायर और कवि का मुकाम रखते हैं
फ़ाज़ली जाने माने बालिवूड फिल्मी गीतकार और गघ लेखक के रूप में भी पहचाने जाते हैं, निदा को उनकी मशहूर ग़ज़ल कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता के द्व

निदा फराज़ली का जीवन परिचय

Nida Fazli
Nida Fazli

मुक्तदा हसन निदा फाज़ली” पूरा है नाम और पेन नेम निदा फ़ज़ली है, ये उर्दू शायर और हिन्दी कवि के रूप में ज़मीनी शायर की हैसियत रखते हैं इनका जन्म 12, अक्टूबर 1938 में ग्वालियर में हुआ और इनकी मृत्यू 08, फरवरी 2016 को मुम्बई में हुई, इनकी शिक्षा विक्टोरिया कालेज या लक्ष्मी बाई कॉलेज मे स्नातकउत्तर तक हुई।

निदा उर्दू शायरी और हिन्दी कविता का ऐसा नाम है जो अपनी सरल और साफ बोलचाल की भाषा में शायरी लिखने का कमाल रखते हैं। निदा अपने अन्दाज़ के अलग शायर हैं जिन्होने धर्म की कुछ सीमाओं को पार करते हुए इन्सानी अहसास को शायरी में पिरोया है और इतनी सादगी से शेर लिखे हैं कि कोई भी इनको पढ़ सकता है समझ सकता है।

इन्होने जब सुरदास, तुल्सीदास, कबीरदास, बाबा फरीद इत्यादी कवियों की कविता को पढ़ा और इन्ही कवियों की सीधी सादी आम ज़बान में रचनाएं लिखने लगे जो कि अधिक प्रभावकारी साबित हुईं, निदा ने मिर्ज़ा ग़ालिब की अमू्रत भाषा को अपनी शायरी में इस्तेमाल करते हुए शायरी की दुनिया में अलग पहचान बनाई।

फ़ज़ली ने धर्मयुग, ब्लिट्ज़ जैसी पत्रिकाओं, समाचार पत्रों के लिए लिखते थे, उनकी सरल भाषा और प्रभावकारी लेखन शैली ने जल्द ही उन्हें सम्मान और लोकप्रियता दिलवाई “सर सय्यद अहमद खां ने कभी कहा था कि दिल की बात ऐसे कही जाए जो दूसरे दिल तक वैसे ही पहूंचे जैसे एक दिल ने दूसरे दिस से कहना चाहा है”, ओर निदा फाज़ली इस हुनर में माहिर थे।
निदा का पहला उर्दू कविता का संग्रह 1961 में छपा।

Nida Fazli holds a very popular poet and in modern poets and poets. Nida Fazli is also recognized as a known Bollywood film songwriter and authored writer, Nida is also recognized by her famous Ghazal, “Kabhi kisi ko mukammal jahan nahi milta”

Introduction of Nida Fazli

Muktada Hasan Nidaa Fazli” is the dull name and the pen name is Nida Fazli, they hold the status as Urdu poet and Hindi poet.
He was born in Gwalior on 12th October, 1938 and died in Mumbai on February 08, 2016, he got education from the Victoria College or Laxmi Bai College till graduation.

Fazli is a name for Urdu poetry and Hindi poetry, which makes it easy to write poetry in its simple and straightforward language. Nida is a different shadow of her esteem, who has crossed the bounds of religion and has thrown innocence into poetry and he has written such lonely simplicity that anyone can read them, understand them.

When Nida read the poems of Surdas, Tulsidas, Kabirdas, Baba Farid etc. and wrote compositions in these simple poems of common poets which proved to be more effective, Nida used the abstract language of Mirza Ghalib in his poetry. In the world of poetry, different identities were made.

Nida used to write journals like Dharmayuga, Blitz, for newspapers, his simple language and influential writing style would soon give him respect and popularity. Sir Syed Ahmed Khan had ever said that the heart’s talk should be told like this, As soon as one heart wants to say the other day, “and Nida Fazli was an expert in this skill.
Nida’s first collection of Urdu poem was printed in 1961.

Top 20 sher of Nida Fazli in Hindi

सब की पूजा एक सी, अलग अलग हर रीत
मस्जिद जाये मौलवी, कोयल गाये गीत

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है

कभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे
वो बदन जब भी सजे कोई नया ख्वाब लगे

ज़हानतों को कहाँ कर्ब से फ़रार मिला
जिसे निगाह मिली उसको इंतज़ार मिला

गरज बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला
चिड़ियों को दाना, बच्चों को गुड़धानी दे मौला

अपना ग़म लेके कहीं और न जाया जाये
घर में बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाये

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं

घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाये

चांद से फूल से या मेरी ज़ुबाँ से सुनिए
हर तरफ आपका क़िस्सा हैं जहाँ से सुनिए

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िन्दगी क्या है किताबों को हटा कर देखो

अब खुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला
हमने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला

दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए

हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिस तो भी देखना हो कई बार देखना

कोशिश भी कर, उम्मीद भी रख रास्ता भि चुन
फिर उसके बाद थोडा मुकद्दर तलाश कर

यहां किसी को कोई रास्ता नही देता
मुझे गिरा के अगर तुम सम्भल सको तो चलो

सब कुछ तो है क्या ढ़ूंढ़ती रहती हैं निगाहें
क्या बात है मैं वक्त पे घर क्यूं नही जात

नक़्शा उढा के कोई नया शहर ढ़ूंढिये
इस शहर में तो सबसे मुलाक़ात हो गयी

कुछ लोग यूंही शहर में हमसे भी ख़फा हैं
हर एक से अपनी भी तबीयत नही मिलती

जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नही है दुनिया
बच्चों के स्कूल में शायद तुमसे मिली नही है दुनिया

Nida fazli ghazals in Hindi

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता

बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले
ये ऐसी आग है जिसमें धुआँ नहीं मिलता

तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो
जहाँ उमीद हो सकी वहाँ नहीं मिलता

कहाँ चिराग़ जलायें कहाँ गुलाब रखें
छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता

ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैं
ज़बाँ मिली है मगर हमज़बाँ नहीं मिलता

चिराग़ जलते ही बीनाई बुझने लगती है
खुद अपने घर में ही घर का निशाँ नहीं मिलता

जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है
ज़ुबाँ मिली है मगर हमज़ुबा नहीं मिलता

तेरे जहान में ऐसा नहीं कि प्यार न हो
जहाँ उम्मीद हो इस की वहाँ नहीं मिलता

गरज बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला
चिड़ियों को दाना, बच्चों को गुड़धानी दे मौला

दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है
सोच समझवालों को थोड़ी नादानी दे मौला

फिर रोशन कर ज़हर का प्याला चमका नई सलीबें
झूठों की दुनिया में सच को ताबानी दे मौला

फिर मूरत से बाहर आकर चारों ओर बिखर जा
फिर मंदिर को कोई मीरा दीवानी दे मौला

तेरे होते कोई किसी की जान का दुश्मन क्यों हो
जीने वालों को मरने की आसानी दे मौला

Nida Fazli Best shayari on Maa

बेसन की सोंधी रोटी पर
खट्टी चटनी जैसी माँ

याद आती है चौका-बासन
चिमटा फुकनी जैसी माँ

बाँस की खुर्री खाट के ऊपर
हर आहट पर कान धरे

आधी सोई आधी जागी
थकी दोपहरी जैसी माँ

चिड़ियों के चहकार में गूंजे
राधा-मोहन अली-अली

मुर्ग़े की आवाज़ से खुलती
घर की कुंडी जैसी माँ

बिवी, बेटी, बहन, पड़ोसन
थोड़ी थोड़ी सी सब में

दिन भर इक रस्सी के ऊपर
चलती नटनी जैसी माँ

बाँट के अपना चेहरा, माथा,
आँखें जाने कहाँ गई

फटे पुराने इक अलबम में
चंचल लड़की जैसी माँ

Nida Fazli Romantic Poetry in Hindi

वो शोख शोख नज़र सांवली सी एक लड़की
जो रोज़ मेरी गली से गुज़र के जाती है
सुना है
वो किसी लड़के से प्यार करती है
बहार हो के, तलाश-ए-बहार करती है
न कोई मेल न कोई लगाव है लेकिन न जाने क्यूँ
बस उसी वक़्त जब वो आती है
कुछ इंतिज़ार की आदत सी हो गई है
मुझे
एक अजनबी की ज़रूरत हो गई है मुझे
मेरे बरांडे के आगे यह फूस का छप्पर
गली के मोड पे खडा हुआ सा
एक पत्थर
वो एक झुकती हुई बदनुमा सी नीम की शाख
और उस पे जंगली कबूतर के घोंसले का निशाँ
यह सारी चीजें कि जैसे मुझी में शामिल हैं
मेरे दुखों में मेरी हर खुशी में शामिल हैं
मैं चाहता हूँ कि वो भी यूं ही गुज़रती रहे
अदा-ओ-नाज़ से लड़के को प्यार करती रहे

अपना ग़म लेके कहीं और न जाया जाये
घर में बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाये

जिन चिराग़ों को हवाओं का कोई ख़ौफ़ नहीं
उन चिराग़ों को हवाओं से बचाया जाये

बाग में जाने के आदाब हुआ करते हैं
किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाये

ख़ुदकुशी करने की हिम्मत नहीं होती सब में
और कुछ दिन यूँ ही औरों को सताया जाये

घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाये

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं

पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है
अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं

वक़्त के साथ है मिट्टी का सफ़र सदियों तक
किसको मालूम कहाँ के हैं किधर के हम हैं

चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफ़िर का नसीब
सोचते रहते हैं कि किस राहगुज़र के हम हैं

गिनतियों में ही गिने जाते हैं हर दौर में हम
हर क़लमकार की बेनाम ख़बर के हम हैं

चांद से फूल से या मेरी ज़ुबाँ से सुनिए
हर तरफ आपका क़िस्सा हैं जहाँ से सुनिए

सबको आता नहीं दुनिया को सता कर जीना
ज़िन्दगी क्या है मुहब्बत की ज़बां से सुनिए

क्या ज़रूरी है कि हर पर्दा उठाया जाए
मेरे हालात भी अपने ही मकाँ से सुनिए

मेरी आवाज़ ही पर्दा है मेरे चेहरे का
मैं हूँ ख़ामोश जहाँ, मुझको वहाँ से सुनिए

कौन पढ़ सकता हैं पानी पे लिखी तहरीरें
किसने क्या लिक्ख़ा हैं ये आब-ए-रवाँ से सुनिए

चांद में कैसे हुई क़ैद किसी घर की ख़ुशी
ये कहानी किसी मस्ज़िद की अज़ाँ से सुनिए

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो

ज़िन्दगी क्या है किताबों को हटा कर देखो

वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में
क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो

पत्थरों में भी ज़ुबाँ होती है दिल होते हैं
अपने घर की दर-ओ-दीवार सजा कर देखो

फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है
वो मिले या न मिले हाथ बढा़ कर देखो

दिन सलीक़े से उगा रात ठिकाने से रही
दोस्ती अपनी भी कुछ रोज़ ज़माने से रही

चंद लम्हों को ही बनती हैं मुसव्विर आँखें
ज़िन्दगी रोज़ तो तस्वीर बनाने से रही

इस अँधेरे में तो ठोकर ही उजाला देगी
रात जंगल में कोई शम्मा जलाने से रही

फ़ासला चाँद बना देता है हर पत्थर को
दूर की रौशनी नज़दीक तो आने से रही

Best Shayari on Religion Nida Fazli

सब की पूजा एक सी, अलग अलग हर रीत
मस्जिद जाये मौलवी, कोयल गाये गीत

पूजा घर में मूर्ती, मीरा के संग श्याम
जितनी जिसकी चाकरी, उतने उसके दाम

सीता, रावण, राम का, करें विभाजन लोग
एक ही तन में देखिये, तीनों का संजोग

मिट्टी से माटी मिले, खो के सभी निशां
किस में कितना कौन है, कैसे हो पहचान

तन्हा तन्हा हम रो लेंगे महफ़िल महफ़िल गायेंगे
जब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे

तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं
देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे

किन राहों से दूर है मंज़िल कौन सा रस्ता आसाँ है
हम जब थक कर रुक जायेंगे औरों को समझायेंगे

अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर-दिल हो मुमकिन है
हम तो उस दिन रो देंगे जिस दिन धोखा खायेंगे

ज़हानतों को कहाँ कर्ब से फ़रार मिला
जिसे निगाह मिली उसको इंतज़ार मिला

वो कोई राह का पत्थर हो या हसीं मंज़र
जहाँ से रास्ता ठहरा वहीं मज़ार मिला

कोई पुकार रहा था खुली फ़िज़ाओं से
नज़र उठाई तो चारो तरफ़ हिसार मिला

हर एक साँस न जाने थी जुस्तजू किसकी
हर एक दयार मुसाफ़िर को बेदयार मिला

ये शहर है कि नुमाइश लगी हुई है कोई
जो आदमी भी मिला बनके इश्तहार मिला

मुहब्बत में वफ़ादारी से बचिये
जहाँ तक हो अदाकारी से बचिये

हर एक सूरत भली लगती है कुछ दिन
लहू की शोबदाकारी से बचिये

शराफ़त आदमियत दर्द-मन्दी
बड़े शहरों में बीमारी से बचिये

ज़रूरी क्या हर एक महफ़िल में आना
तक़ल्लुफ़ की रवादारी से बचिये

बिना पैरों के सर चलते नहीं हैं
बुज़ुर्गों की समझदारी से बचिये

जीवन क्या है चलता फिरता एक खिलौना है
दो आँखों में एक से हँसना एक से रोना है

जो जी चाहे वो मिल जाये कब ऐसा होता है
हर जीवन जीवन जीने का समझौता है
अब तक जो होता आया है वो ही होना है

रात अँधेरी भोर सुहानी यही ज़माना है
हर चादर में दुख का ताना सुख का बाना है
आती साँस को पाना जाती साँस को खोना है

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है

अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है

ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है

ये वक्त जो तेरा है, ये वक्त जो मेरा
हर गाम पर पहरा है, फिर भी इसे खोना है

आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आंगन को
आकाश की चादर है धरती का बिछौना है

कभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे
वो बदन जब भी सजे कोई नया ख्वाब लगे

एक चुप चाप सी लड़की, न कहानी न ग़ज़ल
याद जो आये कभी रेशम-ओ-किम्ख्वाब लगे

अभी बे-साया है दीवार कहीं लोच न ख़म
कोई खिड़की कहीं निकले कहीं मेहराब लगे

घर के आँगन मैं भटकती हुई दिन भर की थकन
रात ढलते ही पके खेत सी शादाब लगे

Nida Fazli Song Lyrics Hindi & Roman Script

तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है तेरी महफ़िल है

हर एक फूल किसी याद-सा महकता है
तेरे ख़याल से जागी हुई फिजाएँ हैं
ये सब्ज़ पेड़ हैं या प्यार की दुआएँ हैं
तू पास हो के नहीं फिर भी तू मुक़ाबिल है

हर एक शय है मोहब्बत के नूर से रोशन
ये रोशनी जो ना हो ज़िन्दगी अधूरी है
राह-ए-वफ़ा में कोई हमसफ़र ज़रूरी है
ये रास्ता कहीं तनहा कटे तो मुश्किल है

Tu is trha se meri zindagi me shamil hai
jahan bhi jaau ye lagta hai teri mahfil hai
har ek phool kisi yad sa mahekta hai
tere khyal se jagi hui fizayen hai
ye sabz ped hain ya pyar ki duayen hai
tu paas hoke nahi fir bhi tu mukabil hai

Har ek shai hai mohabbat ke noor se raushan
ye roshni jo na ho zindagi adhuri hai
rehe wafa me koi hamsafar zaroori hai
ye rasta kahin tanha kate to mushkil hai

होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदग़ी क्या चीज़ है

हम लबों से कह न पाए उनसे हाले दिल कभी
और वो समझे नही ये ख़ामोशी क्या चीज़ है

उनसे नज़रें क्या मिली रौशन फिज़ाएं हो गयीं
आज जाना प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है

खुलती ज़ुल्फों ने सिखाई मौसमों को शायरी
झुकती आँखों ने बताया मैकशी क्या चीज़ है

Hosh walon ko kjabar kya bekhudi kya cheez hai
ishq kije fir samajhiye bekhudi kya cheez hai

hum labon se kah na paye unse hale dil labhi
aur wo samjhe nahi ye khamoshi kya cheez hai

unse nazre kya mili raushan fizayen ho gain
aaj jana pyar ki jadugari kya cheez hai

khulti zulfon ne sikhai mausamon ko shayari
jhukti aankhon ne bataya maikashi kya cheez hai

तेरा हिज्र मेरा नसीब है तेरा ग़म ही मेरी हयात है

मुझे तेरी दूरी का ग़म हो क्यों तू कहीं भी हो मेरे साथ है

मेरे वास्ते तेरे नाम पर कोई हर्फ़ आये नहीं नहीं
मुझे ख़ौफ़-ए-दुनिया नहीं मगर मेरे रू-ब-रू तेरी ज़ात है

तेरा वस्ल ऐ मेरी दिलरुबा नहीं मेरी किस्मत तो क्या हुआ
मेरी महजबीं यही कम है क्या तेरी हसरतों का तो साथ है

तेरा इश्क़ मुझ पे है मेहरबाँ मेरे दिल को हासिल है दो जहाँ
मेरी जान-ए-जाँ इसी बात पर मेरी जान जाये तो बात है

Tera hijr mera naseeb hai tera gham hi meri hayat hai
mujhe teri duri ka gham ho kya tu kahin bhi ho mere sath hai

mere waste tere nam par koi harf aye nahi- nahi
mujhe khaufe duniya nahi magar mere ru-ba-ru teri zaat hai

tera wasl ai meri dilruba nahi meri kismat to kya hua
meri mahjabin yahi kam hai kyateri hasraton la to sath hai

tera ishq mujhpe hai maherban mere dil ko hasil hai do jahan
meri jane jan isi bat par meri jaan jaye to bat hai

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