ڈاکٹر راحت اندوری
- The Legend Shayar

Rahat indori shayari on politics in hindi राहत इंदौरी शायरी हिन्दी में

राहत इन्दौरी ڈاکٹر راحت اندوری  उर्दू अदब साहित्य के आधुनिक शायरों में सबसे लोकप्रिय शायर का मुकाम रखते हैं, जहां राहत इश्क़ पर बोहतरीन शेर कहते हैं वहीं सियासत को सही आईना दिखाते हुए शेर लिखने वाले शायर राहत इन्दौरी अपने श्रोताओं मे सबसे लोकप्रिय हैं

ड़ॉ राहत इन्दौरी सियासत पर बहोत ही सीधा प्रहार करते हुए शेर कहते हैं उनका हर शेर एक टिप्पणी के समान होता है, और इसी अंदाज़ के लिए राहत साहब पूरी दुनिया में मकबूल हैं आज की भारतीय सियासत Indian politics जो की राष्ट्रवाद Nationalism और कश्मीर Kashmir जैसे बडे मुद्दों को चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी BJP ने अपने संकल्प पत्र BJP manifesto 2019 में सबसे पहले वरीयता दी है ऐसे मुद्दो पर कटाक्ष करते हुए डॉ राहत इन्दौरी ने शेर कहे हैं

rahat indori poetry

सरहदों पर बहोत तनाव है क्या
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या

ऐसे ही एक नये शायर आसिफ बाराबंकवी ने पुलवामा हमले और कश्मीर, राम मंदिर और चौकीदार पर अपनी राय देते हुए शेर कहे हैं

ये झूठी तदबीर कहां तक जाएगी
सरहद पर कश्मीर कहां तक जाएगी
अबकी पांच बरस में फिरसे देखेंगे
मंदिर की तामीर कहां तक जाएगी

कैसी है ये ज़िम्मेदारी सांई की
जनती जान गयी मक्कारी सांई की
देश को लूटने वाले लूट के ले जाएं
मान गये हम चौकीदारी सांई की

पुलवामा और सर्जिकल एयर स्ट्राइक air strike जैसे कारनामे पर पैनी नज़र रखते हुए शेर कहे हैं

जंग है तो जंग का मंज़र भी होना चाहिए
सिर्फ नेज़े हाथ में हैं सर भी होना चाहिए

Rahat Indaori Biography in hindi

ग़ज़ल को इशारों कि कला कहा जाता है और राहत इन्दौरी इस कला में माहिर हैं इनके सियासत पर जितने भी शेर हैं वो सीधा ही वहीं पहुंचता है जहां के लिए कहा जाता है, इसके अलावा राहत इंदौरी ने कई फिल्मों में गीत भी लिखे हैं जो की अपने ज़माने में बहोत हिट हुए थे और आज भी हैं जैसे- तुमसा कोई प्यारा कोई मासूम नहीं है, दिल को हज़ार बार रोका, चोरी-चोरी जब नज़रे मिलीं, पहली शर्त जुदाई है, पास वो आने लगे ज़रा ज़रा।

राहत कुरैशी, जिसे राहत इंदौरी के नाम से जाना जाता है, जन्म 01 जनवरी 1950 को इंदौर में रफतुल्लाह कुरैशी, और उनकी पत्नी मकबूल उन निसा बेगम के यहाँ हुआ था। राहत ने अपनी स्कूली शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर से की जहाँ से उन्होंने अपनी हायर सेकंडरी पूरी की। उन्होंने 1973 में इस्लामिया करीमिया कॉलेज इंदौर से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल (मध्य प्रदेश) से उर्दू साहित्य में एमए पास किया। गद्य और कविता में समान रूप से सक्षम, राहत को सम्मानित किया गया। उर्दू साहित्य में पीएचडी मध्यप्रदेश के भोज विश्वविद्यालय ने 1985 में उर्दू मुख्य मुशायरा शीर्षक के लिए किया।

Dr. Rahat indori-profile & Biography

Rahat indori, the most popular Shayar is in the modern urdu poets, Rahat says that the best sher on Ishq and best shayari on politics also, some cuplet is the most popular in his listeners on all over word.

Apart from this, rahat indori has also written songs in many bollywood films, which have been a hit in their time and are still there like – tumsa koi pyara koi masum nahi hai, dil ko hazar bar roka toka roka, chori chori nazren mili, pahli shart judai hai, pas wo aane lage zara zara.

RahatQureshi, known as Rahat indori, was born on January 01, 1950 in Indore, Rafatullah Qureshi, and his wife Maqbool un nisa begum who had come here to. Rahat did his schooling from Nutan School, Indore where he completed his Higher Secondary He completed his graduation from Islamia Karimia College, Indore in 1973 and passed MA in Urdu Literature from Barkatullah University, Bhopal (Madhya Pradesh). Equally competent, Rahat achieved his PhD from Bhuj University of Madhya Pradesh. organized for the title of main Urdu Mushera title in 1985.

He writes poetry in a puple language that could easily understand and praise. But behind those simple words, Rahat Indori poetry hides multiple meanings specially politics poetry

Rahat indori also known his sher on Love and politics also, Rahat Indori Shayari has keen eyes on the politics. There is lots of Rahat Indori Shayari on Politics, some of most popular sher on politics system are given below.

sarhadon par bhot tnaao hai kya?
kuch pata to kro chunao hai kya?

jo taur hai duniya ka usi taur se bolo
bahron ka ilaqa hai zara zor se bolo

ek chingari nazar aayi thi basti me use
wo alag hat gaya aandhi ko ishara karke

Top 5 famous urdu sher of rahat indori

हम से पहले भी मुसाफिर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते

मैं आखिर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता
यहां हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी है

मैं पत्थरों से लडता रहा और चंद लोग
गीली ज़मीन खोद के फरहाद हो गये

मेरी ख़्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उढे
मेरे भाई मेरे हिस्से की ज़मीं तु रख ले

वो चाहता था कि कासा खरीद ले मेरा
मैं उसके ताज की क़ीमत लगा के लौट आया

Rahat indori shayari on politics in hindi – राहत इंदौरी राजनीति शायरी हिन्दी में

poetry on politics

सरहदों पर बहोत तनाव है क्या
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या

अमीर लोग भी राहत से मिलने जुलने लगे
वो अब शराब का आशिक नही है चाय का है

ये लोग पांव नहीं जे़हन से अपाहिज हैं
उधर चलेंगे जिधर रहनुमा चलाता है

हवा खुद अब के हवा के खिलाफ है, जानी
दिए जलाओ के मैदान साफ़ है, जानी

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं

अजीब रंग था मजलिस का, ख़ूब महफ़िल थी
सफ़ेद पोश उठे काएँ-काएँ करने लगे

हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है

जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है

सभी का ख़ून है शामिल यहां की मिट्टी में
किसी के बाप का हिंदोस्तान थोडी है

दिलों में आग लबों पर गुलाब रखते हैं
सब अपने चेहरों पे दोहरी नका़ब रखते हैं

फूलों की ख़ुश्बू लूटी है, तितली के पर नोचे हैं
ये रहजन का काम नहीं है, रहबर की मक़्क़ारी है

जो तौर है दुनिया का उसी तौर से बोलो
बहरों का इलाका है ज़रा ज़ोर से बोलो

एक चिंगारी नज़र आई थी बस्ती में उसे
वो अलग हट गया आँधी को इशारा कर के

Rahat Indori Urdu Poetry

humse pahle bhi musafir kai guzre honge
kam se kam raah ka patthar to hatate jate

mai akhir kaon sa mausam tumhare nam kar deta
yahan har ek mausam ko guzar jane ki jaldi hai

mai pattharon se ladta raha aur chand log
geeli zameen khod ke farhad ho gaye

meri khwahish hai ki aangan me na deewar utthe
mere bhai mere hisse ki zamin tu rakh le

wo chahta tha ki kasa khareed le mera
mai uske taj ki qimat laga ke laut aya

ameer log bhi rahat se milne julne lage
wo ab sharab ka aashiq nahi hai chai ka hai

ye log paw nahi zahn se apahij hain
ye udhar chalenge jidhar rahnuma chalata hai

ajeeb rang tha majlis ka khoob mahfil thi
safed posh uthe kay- kay karne lage

Rahat indori kavita in English

log har mod pe ruk ruk ke sambhalte kyun hai
itna darte hai to fir ghar se nikalte kyun hai

hawa khud abki hawa ke khilaf hai jani
diye jalao ki maidan saaf hai jani

hamare muh se jo nikle wahi sadaqat hai
hamare muh me tumhari zaban thodi hai

jo aaj sahibe masnad hai kal nahi honge
kirayedar hai zati makaan thodi hai

dilon me aag labon par gulab rakhte hai
sab apne chehre pe dohri naqab rakhte hai

phoolon ki khushbu looti hai, titli ke par noche hai
ye rahzan ka kaam nahi hai rahbar ki makkari hai

ek chingari nazar aayi thi basti me use
wo alag hat gaya aandhi ko ishara karke

sabhi ka khoon hai shamil yahan ki mitti me
kisi ke baap ka hindoatan thodi hai

Rahat indori best urdu shayari in hindi

तूफानों से आँख मिलाओ सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोडो तैर के दरिया पार करो
तुमको तुम्हारा फर्ज़ मुबारक हमको हमारा सुलूक
हम फूलों की शाख तराशें तुम चाक़ू पर धार करो

पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं
ज़मीन जहां भी खुले घर निकलने लगते हैं
बलंदियों का तसव्वुर भी खूब होता है
कभी-कभी तो मेरे पर निकलने लगते हैं

खुली हवाओं की सोहबत बिगाड देती है
कबूतरों को खुली छत बिगाड देती है
मिलाना चाहा है जब भी इन्सां को इन्सां से
तो सारे काम अदालत बिगाड देती है
हमारे पीर तक़ी मीर ने कहा था कभी
मियां ये आशिक़ी इज़्ज़त बिगाड देती है
जो जुर्म करते हैं इतने बुरे नही होते
सज़ा ना देके अदालत बिगाड देती है

मोम के पास कभी आग को ला कर देखूं
सोंचता हूं कि तुझे हाथ लगा कर देखूं
मैने दोखा है ज़माने को शराबें पीकर
दम निकल जाए अगर होश में आकर देखूं

तेरी कत्थई आँखों में हैं जंतर मंतर सब
चाक़ू वाक़ू छुरियां वुरियां ख़ंजर वंजर सब
जिस दिन से मुझसे रूढी है रूढे रूढे हैं
तकिया वकीया चादर वादर सब

जिहालतों के अंधेरे मिटा के लौट आया
मैं आज सारी किताबें जला के लौट आया
वो अब भी रेल मों बैढी सिसक रही होगी
मैं अपना हाथ हवा में हिला के लौट आया
खबर मिली है कि सोना निकल रहा है वहां
मैं जिस ज़मीन को ढोकर लगा के लौट आया


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