RSS नेता कृष्ण गोपाल ने दारा शिकोह Dara Shikoh को अच्छा मुसलमान कहा

दारा शिकोह अच्छा मुसलमान

संघ के कार्यक्रता RSS नेता कृष्ण गोपाल Dr. Krishn Gopal के अनुसार “दारा शिकोह Dara Shikoh भारत का सम्राठ बनता तो इस्लाम और फलता फूलता” इस कथन के अनुसार कुछ सवाल उढते हैं कि क्या औरंगज़ेब Aurangzeb एक क्रूर और कट्टरपंथी मुसलमान था? वहीं दूसरी तरफ rss नेता कृष्ण गोपाल के अनुसार दारा शिकोह Dara Shikoh उदारवादी और अच्छा मुसलमान था?

एक सवाल सबसे पहले ये उठता है कि क्या इस समय जब देश मंदी और बेरोज़गारी का शिकार होने को है ऐसी स्तिथी में संघ के नेताओं को मुसलमान नाम पर बात करने का क्या मतलब, हैं और देश का सर्वोत्तम न्यूज़ चैनस Aaj Tak आज तक पर अंजना ओम कश्यप, गौरव भाटिया AMU के स्कॉलर आदि ने कई ऐसे सवाल किये जिसके कारण स्थिति को समझने और फिर आगे फैसला करने को तय्यार रहना पडेगा देश की जनता को ऐसे मंदी के समय में इतिहास की बातों को दोहराने का क्या मतलब है क्या संघ और BJP भारतीय जनता पार्टी देश की आवाम का ध्यान भटकाना चाहते हैं ?

दारा शिकोह अच्छा मुसलमान
दारा शिकोह अच्छा मुसलमान

संघ RSS का अच्छे मुस्लिम के प्रति नरम नज़रिया नेता कृष्ण गोपाल!

कृष्ण गोपाल ने ये भी कहा कि 600 साल हुकूमत करने वाले मुस्लिम खुद को खतरे में क्यों मानते हैं। वहीं केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी Mukhtar Abbas Naqvi ने कहा कि देशभर में दारा की शिक्षाओं का प्रचार किया जाएगा जिससे भारतीय जन मानस में प्रेम, सहिष्णुता, और हर धर्म का सम्मान बढेगा।

दारा शिकोह साम्यवादी विचारधारा तथा उदारवादी था और आज के भारत को ऐसी विचारधारा कि ज़रूरत है परंतु औरंगजेब क्या वाकई में  एक क्रूर शासक था जिसने अपने समय में नरसंहार किया, मंदिरों को तोडवाया ये कुछ सवाल इतिहास के पन्नों में क़ैद हैं जिनका सही खुलासा करना बहोत ही मुश्किल हो सकता है

कृष्ण गोपाल जी नेे ये भी कहा कि कुछ लाख की जंसंख्या वाले पारसी, जैन, बौध्य नही डरते तो फिर 16-17 करोड मुस्लिम लोग अपने आप को खतरे में क्यों मानते हैं। कुछ लोग औरंगज़ेब को आतंकवादी के नाम से भी पुकारने लगे हैं वहीं दारा को राष्ट्रवादी कहा जा रहा है दारा शिकोह भारतीय संसकारों से सराबोर और सूफी संतों की शिक्षा का परिणाम है परंतु सच क्या है यह सवाल बहोत ही मायने रखता है। गोपाल ने यह भी कहा कि इस्लाम से जुडे लोगों ने इस देश को बहोत कुछ दिया परंतु कुछ लोगों ने इस्लाम को बदनाम कर दिया जिनमें औरंगज़ेब प्रमुख है।

औरंगज़ेब बनाम दारा शिकोह दोनो में कौन अच्छा मुसलमान डॉ कृष्ण गोपाल

औरंगज़ेब बनाम दारा शिकोह
औरंगज़ेब बनाम दारा शिकोह

Narrative से पुरानी बातें फिर से उखाडने का राजनीतिक और साम्प्रदायिक दोनो प्रकार से सही नही है क्योंकी अपने समय के कुछ अल्पसंख्यक समुदायों ने औरंगज़ेब को ग़लत साबित करने में कोई कसर नही छोडी और दारा के गुणगान करने में पूरी ताकत लगा दी सवाल यह उठता है कि क्या दारा शुकोह सत्ता के मिलने पर ऐसा हि रवैय्या रखता जैसा कि उसे दिखाया जा रहा है या फिर औरंगजेब से भी अधिक क्रूर शासक साबित होता सवाल यह भी है कि इन बातों को भजप अपने फायदे और मुस्मिमों में अलग गुट का निर्माण करने के लिए नया तरिका अपनाना चाहती है और अगले इलेक्शन की प्रष्ठभूमि तय्यार करना चाहती है।

Dara Shikoh दारा की विचार धारा और उनकी सोंच के अनुसार  विश्व बंधुत्व, हिंदू और इस्लाम धर्म के बीच शांति और विभिन्न धर्मों, संस्कृति और फिलॉसफी में मेलजोल चाहते थे

भारतीयता को हिंदुस्तानी बनाने का RSS का नज़रिया

आज कुछ ऐसे मुल्क जो ये चाहते हैं कि दुनिया में अम्न को मिटा दिया जाए और ऐसे मन्सूबों को अंजाम देने के लिए हमारे मुल्क के नौजवानों को मुलव्विस देखकर फिर मेरा मन ये सोंचने पे मज्बूर हो जाता है कि क्या है हिन्दुस्तान?

जब मैं एक हिन्दु भाई को एक मुसल्मान को नमाज़ के लिए मस्जिद तक पहुंचाता देखता हूं तब मेरा दिल जवाब देता है कि श्रि राम, और श्रि कृष्ण जैसे पाक लोगों की  सरज़मीन है हिन्दुस्तान सहीदों के लहू से सींचा बाग़ है हिनदुस्तानअल्लामा इक़बाल का ख़्वाब, टीपू सुल्तान की क़ुरबानी शहीद भगत सिंघ कि कुरबानी का विरसा है हिन्दुस्तान बाबाए क़ौम माहात्मा गांधी की मेहनत का समर है हिन्दुस्तान.

हिन्दुस्तान वो है जहां आज भि रानी लक्षमी बाई हर एक घर में मौजूद है जो अपने बेटे को जंग पर हंसते हंसते भेज देती है और ऐसी बेगंम हज़रत महल भी हैं जो अपने शहीद शौहर की लाश को हंसते हुए बोसा देती सोशल मीडिया Media पर नज़र आती हैं 

हिन्दुस्तान के एक किनारे कन्याकुमारि, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, राजिस्थान, यू. पी. आध्यात्म की नगरी बनारस, और  काश्मीर जैसा रंग बिरंगा गुल्दस्ता है हिन्दुस्तान और मुल्क फकत एक टुकडा ही नहीं ऐसा नज़रिया है जिसने पूरी दुनिया को सोंचने पर मज्बूर कर दिया।

दारा शिकोह गंगा जमनी तहज़ीब और साहित्य

आज के दौर की बात करूं तो साहित्य भारतीय समाज के हिंदू और मुस्लिम दोनो के आपसी सम्बंधों गंगा जमनी Ganga Jamni Tehzeeb तहज़ीबों को और मज़्बूत करने वाली उर्दू शायरी Urdu Shayari Hindi की पंक्तियां नीचे उप्लब्ध हैं।

क्या दारा की सोच मीर तकी मीर के शेर से मिलती थी 

“उसके फरोगे हुस्न से झमके है सबमे नूर
शम्मए हरम हो या कि दिया सोमनाथ का” 

मरहूम अन्वर जलालपूरि के लफ्ज़ों मे कहूतो यूं होगा..कि

“अनेकता में जहां एकता मिले अन्वर

हम उस दयार को हिन्दुस्तान कहते हैं”

एकता की इसि मिसाल को डाँ. राहत इन्दौरी ने कुछ यूं कहा है

“नमाज़े मुस्तकिल पहचान बन जाती है चहरे की

तिलक जिसतरह माथे पर कोई हिन्दू लगाता है”

जो दिल से दिल तलक पहुंचे वही जादू समझता है।

मोहब्बत, प्यार से फैली हुई खुश्बू समझता है।

ये हिंदुस्तान है साहब, ये यकजहती का मरकज़ है।

यहां मुस्लिम की बेटी को बहन हिंदू समझता है।

मुसल्मां भी यहां गीता के अश्लोकों को पढते हैं

कुराने पाक की आयात को साधू समझता है।

इसी गंगा जमनी तहज़ीब की आवश्यक्ता को पूरा करने के लिए हिंदी साहित्य और उर्दू अदब दोनो ने ही योगदान दिया और आज भारत में ऐसी रचनाएं उप्लब्ध हैं जो भारतीयता को हिंदुस्तानी तहज़ीब की ओर ले जा सकती है। हर धर्म का सम्मान करने वाले व्यक्ति को औरंगजेब ने मृत्यु दे दी मगर ऐसा क्यों हुआ इस पहलू पर भी कोई रौशनी डाले।

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